जजों के घरों का किराया नहीं चुका रही हरियाणा सरकार
22 Feb 2012 18:26 Lalit Kumar Chandigarh

हरियाणा में सरकारी आवासीय सुविधा की कमी के चलते किराए पर रह रहे न्यायिक अधिकारियों को सरकार किराए का भुगतान नहीं कर रही है। ऐसे
में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के मु य सचिव को निर्देश दिए हैं कि न्यायिक अधिकारियों को नियमित रूप से किराए का भुगतान किया जाए।
जस्टिस एम एम कुमार व जस्टिस आलोक सिंह की खंडपीठ ने कहा कि मुख्य सचिव सुनिश्चित करें कि न्यायिक अधिकारियों को इस तरह की परेशानी न उठानी पड़ी। खास तौर पर फरीदाबाद व अन्यों जगहों पर यह समस्या सामने आ रही है।
खंडपीठ ने साथ ही न्यायिक अधिकारियों के बन रहे मकानों व किराए के भुगतान पर हरियाणा सरकार के न्याय विभाग से दो सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट तलब
करते हुए मामले पर 15 मार्च के लिए अगली सुनवाई तय की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किराए के भुगतान अथवा मकानों के निर्माण में देरी
होती है तो इसका कारण भी कोर्ट को बताया जाए। हरियाणा के न्यायिक अधिकारियों की सरकारी आवासीय सुविधाओं को लेकर हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान
लेकर इन मामलों पर सरकार से जवाब तलब किया है।

बुधवार को इस मामले में हरियाणा के वित्त आयुक्त अथवा प्रधान सचिव की तरफ से दिए जवाब में कहा गया कि रतिया में चीफ ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट
(सीजेएम) व न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) के लिए सरकारी मकानों का निर्माण किया जा रहा है जो 31 दिसंबर 2012 तक पूरा कर लिया जाएगा।
इसी तरह भिवानी व रोहतक के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के लिए सरकारी मकानों का निर्माण 30 जून 2012 तक व अंबाला में नारायणगढ़ में 31 मार्च 2013 व पलवल (फरीदाबाद) व नूंह के न्यायिक अधिकारियों के लिए सरकारी मकानों का निर्माण 30 जून 2013 तक पूरा कर लिया जाएगा।