अब लोकायुक्त पुलिस को बार-बार समय नहीं दिया जाएं। सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों की रोशनी में अब चालान पेश करने के आदेश जांच एजेंसी को दिए जाएं।
सुगनीदेवी जमीन घोटाले में विधायक रमेश मेंदोला सहित दो दर्जन आरोपियों के खिलाफ दर्ज केस में मंगलवार को विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में पूर्व मंत्री सुरेश सेठ ने यह मांग न्यायाधीश गौरीशंकर दुबे को दी एक अर्जी में कहीं। श्री सेठ ने अर्जी में बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने डा. सुब्रमण्यम स्वामी बनाम डा. मनमोहनसिंह के केस में 31 जनवरी 2012 को दिए फैसले में जस्टिस जीएस सिंघवी व एके गांगुली ने केस चलाने की इजाजत के बिंदु पर यह अभिमत दिया था कि शासन को तीन माह में अनुमति देना चाहिए तथा एक माह अधिकारीगण को विचार के लिए दिया है। अगर चार माह में शासन केस चलाने की अनुमति नहीं देता है तो यह मान लिया जाएगा कि शासन की अनुमति मिल गई और केस चलाने की अनुमति के बिंदु पर ट्रायल नहीं रोका जा सकता है। इस केस में अभियोजन दो साल से अनुमति दिए जाने की मांग कर रहा है जबकि प्रकाशसिंह बादल व एआर अंतुले के केस में भी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की रोशनी में यह निर्धारित हुआ है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 (1) में सरकार से केस चलाने की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
इसके पूर्व लोकायुक्त पुलिस की ओर से डीएसपी अशोक सोलंकी व विशेष लोक अभियोजक डा. साकेत व्यास हाजिर हुए और केस चलाने की इजाजत के लिए पत्र व्यवहार करने का ब्यौरा देते हुए समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने फिलहाल समय देने से इंकार करते हुएसेठ की अर्जी की कॉपी लोकायुक्त पुलिस को दी और जवाब देने को कहा जिस पर जांच एजेंसी ने बहस के लिए समय मांगा। इस पर बहस के लिए अगली तारीख 5 मार्च मुकर्रर की गई।
क्या है मामला
इंदौर में सुगनीदेवी कालेज के पास तीन एकड़ जमीन घोटाले नगरनिगम ने उद्योगपति नगीन कोठारी व उनके पुत्र को लीज पर दी थी बाद में कोठारी बंधुओं ने नगरनिगम, इंदौर के तत्कालीन महापौर एवं वर्तमान में मप्र के भारी उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने महापौर परिषद के सदस्य एवं नंदानगर सहकारी समिति के अध्यक्ष रमेश मेंदोला को यह जमीन सस्ते दामों में बेच दी जबकि लीज की जमीन बेची नहीं जा सकती थी। इस मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक एवं मंत्री सुरेश सेठ की शिकायत पर वर्ष 2010 में लोकायुक्त पुलिस ने रमेश मेंदोला सहित 17 लोगो के खिलाफ केस दर्ज किया था। फिलहाल मंत्री विजयवर्गीय को आरोपी नहीं बनाया गया है और न चालान पेश किया जा रहा है।
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